Meaning of Gunchaa

गुरुवार, जून 18, 2026

दोस्त - भाग 2



दोस्त/ friends कई प्रकार के होते हैं

कोई सोने की तरह होते हैं
24 तोले से ज़्यादा, चमक उनकी नज़र आती है
वक़्त के साथ कीमत जिनकी बढ़ती जाती है

तो कोई चांदी की तरह होते हैं
समय के साथ चमक जिनकी फीकी पड़ जाती है
और कालिख़ अंदर की बाहर आ जाती है

कुछ होते हैं Best Friend
जो मुसीबत पड़ने पर सबसे ऊपर करते हैं Trend
और जिनपे आप कर सकते हो थोड़ा depend

कुछ होते हैं Social Media के दोस्त
जो बनाए थे तुमने, कि काम आ जाएं किसी रोज़
पर वो emoji बना के ज़ाहिर कर देते हैं खुशी या अफ़सोज़

कुछ दूर के दोस्त (Pen Friend)भी बन जाते हैं
राब्ता जिनसे चाहे ज़्यादा न हो, पर सहानुभूति देने के काम आते हैं

कुछ ऑफिस के ऐसे कॉलीग भी होते हैं
चहरे पे जिनके मुखोटा दोस्त का और तरकश में ज़हर वाले तीर होते हैं

पर कोयले की खान में कभी-कभी हीरा भी मिल जाता है
अदावतें दुनिया की ले के भी, वो तुम्हारे बाज़ू में खड़ा नज़र आता है


*तरकश- वो टोकरी जिसमें तीर रखते हैं
*अदावतें - दुश्मनी


- मनप्रीत

मंगलवार, जनवरी 06, 2026

वो बातें...



क्या कभी सोचा है कि...

वो बातें...

जिन्हें सुन के हम हो जाते हैं अनजान
मन के किसी कोने में होता है हमें उनका ज्ञान

वो बातें...

जिन्हें कह पाती नहीं ज़बान
उन्हीं बातों से दिल में उठता है तूफ़ान

वो बातें...

जिनसे तुम मूंह फेर लेते हो
हकीकत में तुम उन्हें स्वीकार कर लेते हो

वो बातें...

जिनका न अंत है, न कोई आगाज़ है
वह तो केवल समय बिताने का तुम्हारा प्रयास है

वो बातें...

जो ज़बां से नहीं आखों से की जाती हैं
उन्हें बयां करने में कुछ देर तो लग ही जाती है

वो बातें...

जो कहते नहीं तुम सब से
जानता हूं... करते हो अकेले में अपने रब से

वो बातें...

जो लोगों ने तुम्हे मेरे बारे में तुम्हें बताई हैं
सच मानो... उनमें थोड़ी सी सच्चाई है


- मनप्रीत




शनिवार, जनवरी 03, 2026

धुआं-धुआं



क्यों साँसे थम रही हैं
क्यों आँखें जल रही हैं
क्या ज़िंदगी की कीमत है कोड़ियों की भांति

क्यों दिन में भी धुआं है
क्यों रात है ज़हरीली
क्या समझौतों की ज़िन्दगी आज हमने जीली

क्यों मीटर AQI के लगे अब हांफने
क्यों सच्चाई के आंकड़े लगे तुम ढांकने
क्या सस्ती ज़िंदगी पर भारी है राजनीति

क्यों आसमान काला
क्यों दम ये घुट रहा है
ये साल मेरी ज़िंदगी के कौन लूट रहा है

क्यों सुट्टे सा भारी धुआं है अब सांस में
क्यों air purifier भी लगा है अब खांसने
क्या ज़िंदा और मुर्दे में फर्क नहीं है बाकी

क्यों झूठे हैं ये वादे
क्यों भ्रष्ट हैं इरादे
क्या नीयत में इनकी है खोट की मिलावट

क्यों सावधान होने का वक़्त है तुम्हारा
क्यों हर साल की ये अब बन गई कहानीजो
अब भी न खौला खून है नहीं वो पानी


- मनप्रीत