जहां थोड़े सुकून से "सांस" ले सकूं
एक ऐसा कमरा...
जहां बिस्तर पे लेटूँ तो तुरंत नींद आ जाए
जहां तकिये के किनारे पर
पुरानी यादें मेरा इंतेज़ार न कर रही हों
रोशनी के लिए केवल एक छोटा सा बल्ब हो तो भी चलेगा
पर मन को रोशन करने वाली ऊर्जा भरपूर हो
मोबाइल, टीवी, जैसी आधुनिक चीजों का शोर ना हो
क्योंकि शोर... वह तो मेरे अंदर भी बहुत है
एक ऐसा कमरा...
जहां रात को आंख बंद करूं तो "झींगुर" का साज़ सुनाई दे
और सुबह आंख खोलूं तो पंछियों का संगीत
कोई पड़ोसी बात करने के लिए नहीं हो तो भी मैं रह लूंगा
उससे नहीं तो ख़ुद से ही अपना हाल कह लूंगा
पर हां... एक 2x2 का रोशनदान ज़रूर हो
जहां बैठ कर कुछ वक्त गुज़ार सकूं अपने साथ
ऐसा एक कमरा कहीं मिले तो मुझे बता देना
नहीं तो... "सांस" तो मुझे इस घर में भी आती है, कुछ उखड़ी-उखड़ी सी...
- मनप्रीत