Meaning of Gunchaa

रविवार, मई 27, 2012

मेहँदी..


इस कविता में मैंने एक बेटी के मन की व्यथा लिखने की कोशिश की है जिसके मन में एक
तरफ तो अपने पिया के घर जाने की ख़ुशी है, और दूसरी तरफ अपने पिता से बिचड़ने
का गम है।

मेहँदी मेरे हाथों की क्या कहती है बाबुल्वा
देस तेरा होयो परायो रे...

अंगना वो पीछे छूट गयो
सखी-सहेलडिया भी सब रूठ गयो
अन्सूअन संग ये बहता कजरा क्या कहता है बाबुल्वा
देस तेरा होयो परायो रे...




अब न सुन पाओगे तुम मेरी बतियन
अब न तुम्हारी गोद में सर रख के सो पऊंगी
मेरे हाथों का ये "चूड़ा" क्या कहता है बाबुल्वा
देस तेरा होयो परायो रे...

जो पल तेरे साथ बिताये मैंने, उनकी यादें छोड़ जाऊंगी
भाई-बहनों से मूंह मोड़ कर, पिया देस चली जाऊंगी
दिल की मेरी ये धड़कन ये कहती है  बाबुल्वा  
अब मैं तेरे अंगना से जल्दी ही उड़ जाऊंगी...
और बाबुल जैसा प्यार पिया देस पाऊँगी...

1 टिप्पणी:

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति. कमाल का शब्द सँयोजन
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

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