क्या कभी सोचा है कि...
जिन्हें सुन के हम हो जाते हैं अनजान
मन के किसी कोने में होता है हमें उनका ज्ञान
वो बातें...
जिन्हें कह पाती नहीं ज़बान
उन्हीं बातों से दिल में उठता है तूफ़ान
वो बातें...
जिनसे तुम मूंह फेर लेते हो
हकीकत में तुम उन्हें स्वीकार कर लेते हो
वो बातें...
जिनका न अंत है, न कोई आगाज़ है
वह तो केवल समय बिताने का तुम्हारा प्रयास है
वो बातें...
जो ज़बां से नहीं आखों से की जाती हैं
उन्हें बयां करने में कुछ देर तो लग ही जाती है
वो बातें...
जो कहते नहीं तुम सब से
जानता हूं... करते हो अकेले में अपने रब से
वो बातें...
जो लोगों ने तुम्हे मेरे बारे में तुम्हें बताई हैं
सच मानो... उनमें थोड़ी सी सच्चाई है
- मनप्रीत
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