Meaning of Gunchaa

रविवार, दिसंबर 18, 2011

नैनों की भाषा



कभी किसी की याद में पलकें मेरी भीग जाती हैं
तो कभी ख़ुशी के मारे ये बिना वजह भर आती हैं
ना जाने ये आँखें क्या कहना चाहती हैं...

जो देख ले कोई प्यारभरी  नज़र से
शर्म से ये झुक जाती हैं
जागती आँखों से ही कितने, ख्वाब ये देख जाती हैं
ना जाने ये आँखें क्या कहना चाहती हैं...

कभी किसी की तलाश में बेचैन हो जाती हैं
बिछड़ जाए कोई अपना तो सारी रात जगाती हैं
हर पल सूरत उसी की फिर आईने में नज़र आती हैं
ना जाने ये आँखें क्या कहना चाहती हैं...

कभी ये सोचता हूँ दिल की मेरे व्यथा,
माँ कैसे जान जाती है?
जितना छुपाऊँ माँ तुझसे मैं
भेद मेरे ये सारे खोल जाती हैं
ना जाने ये कम्बखत आँखें क्या कहना चाहती हैं...

कौन जानता है किस मुसीबत में ये डाल दे हमें
ज़िंदगी की किन लहरों में डूबा दें हमें
हर पल हम जीते हैं,
हर पल हम मरते हैं
पर अब इन आँखों पे, हम भरोसा नहीं करते है...

4 टिप्‍पणियां:

akki ने कहा…

owesome bhaiya..:)

अजय कुमार झा ने कहा…

आपके ब्लॉग से आज परिचय होना बहुत अच्छा लगा । खूबसूरत कलेवर भी भा गया

Sunil Kumar ने कहा…

yah to aankhen hai naa jane kya kya karti hai

मदन मोहन सक्सेना ने कहा…

बहुत सुंदर ! जितनी सार्थक रचना उतनी ही कलात्मक ! शुभकामनायें !
कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
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